सियासी अखाडे में दोनो रावण भाजपाई जलाएंगे, राम घर से ही देखेंगे
दून विस की राजनीति में इस बार भी प्रभु की अनोखी लीला
शांति गौतम , बददी ( 7 अक्तूबर ) प्राचीनकाल की रामायण के समय से ही राम ही रावण को मारता है और लंका दहन करता है। लेकिन इस बार भी मायावी हकीकत की दुनिया में राम -रावण का दहन नहीं कर पाएंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं दून विधानसभा क्षेत्र की सियासत की जहां दो दो बडे रावण के पुतले बनें है लेकिन दून के कांग्रेस के बडे नेता राम उसमें से एक का भी दहन नहीं कर पाएंगे। प्रभु श्रीराम ने इस बार भी विधि का ऐसा विधान रचा है कि राम ही रावण को दहन नहीं कर पाएंगे यानि राम की भूमिका में कोई नया योद्वा ही रथ पर सवार होगा। सियासी समीकरण बिगडने व विस चुनावो की करारी हार के कारण राम को रावण जलाने से लगातार दूसरी बार भी वंचित होना पड रहा है जिसको लेकर पूरे दून में चर्चा का माहौल है। हुआ यूं कि बददी शहर में रावण के दो भव्य पुतले बन रहे हैं। पहला आयोजन सरकारी स्तर पर यानि नगर परिषद बददी की तरफ से हाऊसिंग बोर्ड फेस तीन बददी के दशहरा मैदान में हो रहा है जहां चालीस फुट का रावण है। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर दून भाजपा विधायक परमजीत सिंह शिरकत करेंगे। वहीं दूसरी ओर बददी के वार्ड दो का कार्यक्रम स्थानीय ग्रामवासी आपसी भाईचारे से मिलकर गैर राजनीतिक तौर पर बिना किसी सरकारी सहायता से करते हैं। यहां पर रिकार्ड तोड 70 फुट ऊंचा भव्य रावण बन चुका है जिसके साथ मेघनाथ व कुभंकर्ण के पुतले भी हैं। यहां पर भी दून के राम को रावण को जलाने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि सत्ता परिवर्तन ने उनको हाऊसिंग बोर्ड से तो वंचित कर दिया तो यहां पर फिजा बदली-बदली सी है। दशहरा कमेटी बददी ने इस बार के कार्यक्रम में जिला भाजपा सचिव बलविंद्र सिंह ठाकुर ऊर्फ नीटू भाई, भामसं के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष मेलाराम चंदेल तथा जनशक्ति मजदूर सभा के प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार राजू मुख्य को मुख्य अतिथियों के रुप में आंमत्रित किया है। इसे प्रभु राम की ही ऐसी विधा माना जाएगा कि उसने भाजपा नेताओं के लिए दो दो रावणों के दहन करने को दिए और कांग्रेस को एक से भी वंचित कर दिया। कांग्रेस नेता राम अब प्रभु रामजी की रची अनोखी लीला के कारण घर से बैठकर ही रावण के दहन का नजारा लेंगे और रावण को अग्रि नहीं दे पाएंगे। ऐसा सियासत में अक्सर होता है कि जब समय व फिजा अनूकूल नहीं होता तो सियासी नेताओं को ऐसे क्षणों से गुजरना ही पडता है लेकिन वो हिम्मत नहीं हारते और मोर्चे पर डटे रहते हैं। वहीं ऐसी भी धारणा है कि बददी में जो भी नेता रावण का दहन करता है वह देर सवेर विधायक का या कोई बडा ताज पहनकर शिमला जरुर पहुंचता है।
कमेटी ने पिछले साल के दोनो नेताओं से बनाई दूरी-
गत साल बददी वार्ड दो में दशहरा में मुख्य अतिथि बनकर कर दोनो नेताओं ने अपनी अपनी घोषित राशि देने का एलान प्रभु राम को साक्षी मानकर की थी। एक साल बाद भी दोनो नेताओं ने सत्ता के सोपान की सीढीयां तो खूब चढ़ी लेकिन प्रभु राम के सामने की घोषणाओं को भूल गए। दशहरा कमेटी बददी ने दोनो नेताओं को इस बार साधारण न्यौता भेजा है समारोह में आने के लिए ताकि उनको अपने पैसे के घमंड से आई चादर की परत उतरानी पड जाए। श्रद्वालुओं में चर्चा है कि अगर यह दोनों बडे गददीनशीं नेता बददी दशहरे से दूरी बनाते हैं तो कहीं उनका हश्र भी पूर्व के विधायकों की तरह ही न हो जाए और उनका कैरियर इतिहास में दफन न हो जाए। अगर आते हैं तो वो समारोह में शामिल तो होंगे लेकिन वो रावण दहन नहीं कर पाएंगे क्योंकि अब यह अधिकार कमेटी ने जिला भाजपा सचिव बलविंद्र ठाकुर, मेलाराम व राजकुमार को दे दिया है। मंलगवार को देखना होगा कि प्रभु की अनोखी लीला क्या रंग लाती है।































