डीसी ऊना संदीप कुमार ने आधार क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ से उठाया मामला
जसवाल, ऊना (3 दिसंबर)- सरकार ने विभिन्न योजनाओं के लाभ प्रदान करने को आधार नंबर अनिवार्य किया है, लेकिन अगर आधारकार्ड में कोई गलती हो तो इन योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है। यूं तो आधार कार्ड में हुई गलतियां घर बैठ कर ऑनलाइन या फिर किसी भी आधार केंद्र पर जाकर आसानी से ठीक कराई जा सकती हैं। लेकिन ऊना में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें सुधार के लिए लगभग डेढ़ वर्ष का समय लग गया है। मामला सुलझा भी तब जाकर जब उपायुक्त ऊना संदीप कुमार ने यह मामला शिमला व आधार क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के साथ उठाया। दरअसल ग्राम पंचायत नारी की 48 वर्षीय महिला सुनीता देवी ने वर्ष 2018 में आधार कार्ड बनवाया था लेकिन कार्ड पर उसका नाम किन्ही कारणों से गलत दर्ज हो गया। इसके बाद न तो उसे आधार कार्ड डाक से मिला और न ही उसे अपना आधार नंबर मालूम था। जब सुनीता देवी बीमार पड़ी और ऑपरेशन के लिए उसे सरकारी मदद की आवश्यकता पड़ी तो उससे आधार कार्ड की जानकारी मांगी गई लेकिन उसके पास आधार कार्ड था ही नहीं।
सुनीता देवी ने बताया कि ऑपरेशन के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने को उसने दोबारा आधार कार्ड बनवाने के लिए आवेदन भरा लेकिन फिंगर प्रिंट व रेटिना पहले से ही रिकॉर्ड में दर्ज था, इसलिए उसका आवेदन डुप्लीकेट होने की वजह से रद्द हो गया। यानी उसका आधार कार्ड तो पहले से ही बना हुआ था। लेकिन उसे अपने आधार कार्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि उसे कभी उसका आधार कार्ड मिला ही नहीं। उन्होंने बताया कि वह अपनी समस्या लेकर उपायुक्त ऊना संदीप कुमार के पास गईं। जिसके बाद डीसी ने यह मामला शिमला में आईटी विभाग के उप निदेशक अनिल सेमवाल से उठाया, साथ ही आधार क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ से भी संपर्क साधा गया। तब जाकर डाटाबेस से सुनीतादेवी का आधार नंबर निकाला गया।
उपायुक्त ऊना संदीप कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायत नारी की सुनीता देवी अपनी समस्या लेकर उनके पास आईं थी। आधार नंबर मिलने के बाद महिला का नाम कार्ड पर ठीक करवाया गया और उसके आधार को फोन नंबर के साथ भी लिंक करवाया गया है। लगभग एक सप्ताह पहले ग्राम पंचायत निवासी सुनीता देवी को उसका आधार कार्ड दे दिया गया है।

































