कब्जामुक्त करवाने पहुचे प्रशासनिक अमले को ग्रामीणों के कड़े विरोध का करना पड़ा सामना

करनाल, आशुतोष गौतम (13 नवंबर) गाँव दहा में सरप्लस की भूमि को कब्जामुक्त करवाने पहुचे प्रशासनिक अमले को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। अधिकारियो व पुलिस के आने की भनक लगते ही सैकड़ो की संख्या में महिला पुरुष अपने खेतो और मकानों के सामने डट गए। ग्रामीणों ने दहा व मदनपुर की तरफ से आने वाले सभी रास्तो को जाम कर दिया जिस वजह से सरकारी गाडिया विवादित भूमि तक नही पहुची। ग्रामीणों के आक्रोश को भांपते हुए ड्यूटी मैजिस्ट्रेट रविन्द्र कुमार व डीएसपी रामदत पुलिस बल के साथ पैदल लोगो को समझाने पहुचे लेकिन ग्रामीण टस से मस नही हुए। ग्रामीणों ने अधिकारियो को चेताया की भूमि पर कब्जा करने की जल्दबाजी न करे क्योकि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। दहा गाँव में सरप्लस की भूमि को लेकर चल रहे विवाद में ग्रामीण व प्रशासन आमने सामने है। ग्रामीण पहले ही महापंचायत के जरिये कोर्ट के फैसले का विरोध कर चुके है।

कब्जा कार्रवाई के लिए बुधवार दोपहर करीब 12 बजे डयूटी मैजिस्ट्रेट रविन्द्र कुमार व डीएसपी रामदत की अगुवाई में पुलिस व प्रशासन के अधिकारी दहा गाँव में पहुचे। प्रशासन के आने की सुचना मिलते ही ग्रामीणों दहा से मदनपुर की तरफ जाने वाली सडक पर अवरोध खड़े कर दिए। सड़क पर वाहनों के आवागमन नही होने के कारण अधिकारियो की गाडिया दहा गाँव के पास ही रोकना पड़ा। प्रशासन की एंट्री को देखते हुए सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण सडक और खेतो में खड़े हो गए। डयूटी मैजिस्ट्रेट व डीएसपी ने धरना स्थल के पास पहुचे और मौजिज लोगो व पीड़ित पक्ष से बातचीत शुरू की। पीड़ित परिवारों का पक्ष रखते हुए, करता राम कश्यप, जीवन, सुभाष, उमेद सिंह कश्यप, बंसी व अन्य लोगो ने अधिकारियो को बताया कि यह मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है और इस केस की सुनवाई चल रही है। उन्होंने मांग रखी कि प्रशासन फैसला आने तक कोई कार्रवाई न करे। ग्रामीणों के तेवरों को देखते हुए अधिकारियो ने मौजिज लोगो के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव रखा। उमेद सिंह कश्यप, करता राम कश्यप, सुभाष, मन्नू कश्यप, जयभगवान व एडवोकेट जयपाल अधिकारियो के साथ बातचीत करने के लिए मधुबन थाने पहुचे। मधुबन थाने में अधिकारियो के साथ हुई बैठक में सभी पहलुओ पर चर्चा की गई। बातचीत के बाद अधिकारियो ने कब्जा कार्रवाई को स्थगित कर दिया। इस बैठक में शामिल हुए उमेद सिंह कश्यप ने बताया कि पीड़ित परिवारों के पास जमीन के मालिकाना हक के सभी दस्तावेज है और यह मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन। प्रशासन ने मौके की स्थिति को देखते हुए पीड़ित परिवारों को दस दिनों की मोहलत दी है। ड्यूटी मैजिस्ट्रेट रविन्द्र कुमार ने कहा की शांति व्यवस्था को देखते आज की कार्रवाई स्थगित की गई है।
ये है मामला: हरियाणा गठन के बाद हुए एक सर्वे में दहा गाँव के रकबे की करीब 33 एकड़ भूमि सरप्लस हुई थी। साल 1968 में सरकार ने इस सरप्लस भूमि को सत्रह परिवारों को अलाट कर दिया। जमीन अलाट होने के बाद उनके बुजर्गो ने सरकारी नियमो के अनुसार भुगतान भी किया था। सरकार को दी गई किस्तों की रसीदे आज भी उनके पास है। अलाटमेंट के पचास वर्षो बाद सरप्लस भूमि को ख़ारिज करने के आदेश जारी होने के बाद तीन दर्जन परिवारों पर बेघर होने की तलवार लटक गई थी। पीड़ित परिवारों के समर्थन में हुई महापंचायत में इस फैसले के विरोध का ऐलान कर दिया ।































