बेटियों को दाह संस्कार का अधिकार दिलाने के लिए बनाई फिल्म दि लास्ट राइट्स
करनाल, आशुतोष गौतम( 22 जनवरी ) बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ व महिला सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही सरकारी मुहिम के बीच करनाल की बेटी आस्था वर्मा ने भी बेटियों को अधिकार दिलाने के लिए एक अनूठी पहल की है। आस्था ने एक फिल्म का निर्माण किया है। जिसमें बेटियों को बेटों की तरह दाह संस्कार करने का अधिकार दिलाने का मुद्दा उठाया है। इस फिल्म की प्राइवेट स्क्रीनिंग यूएसए के लॉस एंजेल्स के प्रसिद्ध वार्नर ब्रदर्स स्टूडियो में की गई जहां फिल्म को काफी सराहा गया और वहां विदेशी दर्शकों ने इस लघु फिल्म के विषय के बारे में और ज्यादा जानने के लिए अपनी जिज्ञासा दिखाई। बुधवार को करनाल के इबोला क्लब में फिल्म की स्क्रीनिंग की गई। जहां दर्शकों ने फिल्म की काफी सराहना की। जानकारी देते हुए आस्था के पिता एंव साधविश फिल्मस के एमडी अनिल वर्मा ने बताया कि आस्था का जन्म 2 सितंबर 1996 को करनाल में हुआ। कुछ समय बाद वह दुबई शिफ्ट हो गए। वहीं दिल्ली पब्लिक स्कूल दुबई में ही आस्था ने हाई स्कूल शिक्षा पूरी की। इसके बाद हेरिएट वाट यूके स्कॉटलैंड यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग मैनेजमेंट में एमबीए किया। बाद में लॉस एंजिल्स – यूएसए में न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी के माध्यम से फिल्म मेकिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी पहली अंग्रेजी फिल्म दि अनसंग फैदर ने यूएसए, यूरोप में कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार सहित 9 पुरस्कार हासिल किए जो विदेश में एक सामाजिक विषय रेसिस्म पर आधारित उनकी दूसरी फिल्म भी सामाजिक मुद्दे पर आधारित थी जो एक लड़की के संघर्ष को दशार्ती है जो अपनी दादी मां के अंतिम संस्कार का अधिकार पाने और उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए समाज से लड़ती है। फिल्म का शीर्षक है- द लास्ट राइट्स जो जल्द ही भिन्न भिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भेजे जाने के बाद रिलीज के लिए तैयार होगी। उन्होंने 40 से अधिक लघु फिल्में की हैं, जिसमें उन्होंने अधिकतर फिल्मों में लेखिका, निर्देशक और निमार्ता के रूप में काम किया। 23 साल की आस्था ने छोटी सी उम्र में वो मुकाम हासिल किया है जिसे पाने में कई साल बीत जाते है।
वाराणसी के गंगा घाटों पर फिल्माए दृश्य- आस्था वर्मा ने अपनी फिल्म द लास्ट राइटस के लिए ऐसी लोकेशंस को चुना जहां उसका जीवंत किरदार सामने आए। इसके लिए वाराणसी के गंगा घाटों पर फिल्म के दृश्य फिल्माए गए। खासकर उस घाट पर दाह संस्कार का दृश्य फिल्माया गया। जहां महिलाओं के लिए जाना मनाही है। इसके लिए आस्था ने ब्राह्मणों शिक्षाविदों संतों महात्माओं से इस विषय के बारे में जाना और पूरी स्क्रिप्ट तैयार की। अब इसे बड़ी फिल्म के रूप में फिल्माया जाएगा और जल्द ही दर्शक इसे देख पाएंगे।
कल्पना चावला पर बनेगी अगली फिल्म- समाज में अपने अधिकार पाने और आगे बढ़ने के लिए बेटियों को किस तरह से संघर्ष करना पड़ता है। आस्था इन्हीं विषयों पर ही काम कर रही है। आस्था की एक अंग्रेजी फिल्म दि अनसंग फैदर भी इस पर आधारित रही जिसमें एक काले रंग की लड़की को किस तरह से गोरों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। फिल्म दि लास्ट राइट्स इ्स््का््क अधिकार बेटियों को दिलाने पर केंद्रित है। अब आस्था करनाल की अंतरिक्ष परी कल्पना चावला को लेकर फिल्म बनाने का विचार कर रही है।

































